खाड़ी देशों से प्रवासियों के पलायन की आशंका | प्रवासी आबादी 10% तक गिर सकती है

ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिस्ट के एक ग्रुप रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी सहयोग परिषद के छह देशों सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात मे कार्यरत प्रवासियों आबादी 10% तक गिर सकती है। क्योंकि कोरोनोवायरस के प्रभाव से जूझ रहे तेल-समृद्ध देशों को छोड़ने के लिए विदेशी श्रमिकों को मजबूर कर रहा है।

ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स मिडल ईस्ट के मुख्य अर्थशास्त्री स्कॉट लिवरमोर ने अपने लेख मे लिखा है, ” प्रवासी वर्करों पर जीसीसी की निर्भरता और जॉब लॉस होते लोगों की बड़ी संख्या व लंबे समय से चल रहे लॉकडाउन के कारण सभी सेक्टरों के नौकरियों मे भारी गिरावट हो सकती है”, ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स रिपोर्ट पढ़े-सऊदी अरब 1932 से अब तक के राजाओं व ताज-राजकुमारों की सूची व इतिहास

जीसीसी कोविड -19 के प्रसार को कम करने के लिए लॉकडाउन एक रूप में मंदी जैसा है और तेल की कम कीमतों के असर ने तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, GCC देशों में लगभग 13% रोज़गार मे गिरावट हो-सकता है,  रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में 900,000 नौकरी पर इसका प्रभाव पड़ सकता है दूसरी तरफ सऊदी अरब में 1.7 लाख नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। पढे-खाड़ी सहयोग परिषद GCC का गठन व उद्देश्य? 

कमजोर क्षेत्रों में प्रवासी कामगारों पर निर्भरता का मतलब है कि रोज़गार के नुकसान का बोझ प्रवासी आबादी पर गिरेगा। रोज़गार और एक सामाजिक सुरक्षा कवच की कमी और वीज़ा पर संयुक्त निर्भरता (यानि इकामा मेडिकल आदि का भारी-भरकम बोझ)  इस आधार पर प्रवासीयों के पलायन की संभावना अत्यधिक है। 

इसके परिणामस्वरूप प्रवासियों की आबादी, सऊदी अरब और ओमान में 4% की कमी हो सकती है और लगभग 10% यूएई और कतर में कमी  हो सकती है। पढ़े-क्या आप जानते हैं संयुक्त अरब अमीरात का कब और कैसे गठन हुआ था !

हालांकि इस पलायन का मतलब जीसीसी देशों मे मंदी के प्रभाव हो सकता है। इसके प्रमुख क्षेत्रों पर कुछ प्रतिकूल परिणाम भी होंगे, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को श्रमीको की कमी के रूप झेलना पड़ सकता है प्रॉपर्टी मार्केट्स पर अतिरिक्त खींचतान दिखना संभावित है।

स्रोत -investing.com

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